महाशिवरात्रि 2019: दुनिया के इन देशों में भी मौजूद हैं भगवान शिव के मंदिर

महाशिवरात्रि 2019: दुनिया के इन देशों में भी मौजूद हैं भगवान शिव के मंदिर
Publish Date:02 March 2019 12:45 PM

भगवान शिव के भक्त केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी हैं। भारत के अलावा कई देशों में भगवान शिव के कई मंदिर मौजूद हैं। महाशिवरात्रि के मौके पर भोलेनाथ के भक्त मन से पूजा पाठ करते हैं। शिव भक्तों के लिए महाशिवरात्रि का मौका बहुत ही खास होता है कि भगवान शिव को खुश कर सकें। भारत के शिव मंदिरों में तो महाशिवरात्रि के दिन भक्तों का खूब तांता लगा रहता है। इसके अलावा विदेश में भी भगवान शिव के मंदिर में इस खास मौके पर खूब भीड़ लगती है तो आइए जानते हैं भारत के अलावा किन देशों में शिव मंदिर मौजूद हैं। 
प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया 
प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया के जावा नाम की जगह पर है। यह मंदिर 10वीं शताब्दी में बना था। यह शहर से 17 कि.मी की दूरी पर स्थित है। इंडोनेशिया में घूमने आने वाले लोग इस मंदिर में दर्शन करने जरूर जाते हैं। प्रम्बानन मंदिर स्थित शिव मंदिर बहुत बड़ा और सुंदर है। प्रम्बानन मंदिर में मुख्य तीन मंदिर हैं- एक भगवान ब्रह्मा का, एक भगवान विष्णु का और एक भगवान शिव का। सभी भगवानों की मूर्तियों के मुंह पूर्व दिशा की ओर है। हर मुख्य मंदिर के सामने पश्चिम दिशा में उससे संबंधित एक मंदिर है। यह मंदिर भगवानों के वाहनों को समर्पित है। भगवान ब्रह्मा के सामने हंस, भगवान विष्णु के लिए गरूड़ और भगवान शिव के लिए नन्दी का मंदिर बना हुआ है। इनके अलावा परिसर में और भी कई मंदिर बने हुए हैं। यह मंदिर तीनों देवों के मंदिरों में से मध्य में है। शिव मंदिर के अंदर चार कमरे हैं। जिनमें से एक में भगवान शिव की विशाल मूर्ति है, दूसरे में भगवान शिव के शिष्य अगस्त्य की मूर्ति है, तीसरे में माता पार्वती की और चौथे में भगवान गणेश की मूर्ति स्थित है। शिव मंदिर के उत्तर में भगवान विष्णु का और दक्षिण में भगवान ब्रह्मा का मंदिर है।
कटासराज मंदिर पाकिस्तान
कटासराज मंदिर पाकिस्तान से 40 कि.मी. की दूरी पर है। यह कटस में एक पहाड़ी पर स्थित है। महाभारत काल में भी यह मंदिर था। पांडवों की इस मंदिर से कई कथाएं जुड़ी हैं। इस मंदिर का कटाक्ष कुंड भगवान शिव के आंसुओं से बना है। इस कुंड के निर्माण के पीछे एक कथा है। मान्यता हैं कि पौराणिक काल में भगवान शिव जब सती की अग्नि-समाधि से काफी दुखी हुए थे तो उनके आंसू दो जगह गिरे थे। एक से कटासराज सरोवर का निर्माण हुआ तो दूसरे से पुष्कर का।
मुन्नेस्वरम मंदिर, श्रीलंका
मुन्नेस्वरम मंदिर का इतिहास रामायण काल से सम्बंधित है। मान्यताओं के अनुसार, रावण को मारने के बाद भगवान श्री राम चन्द्र जी ने इसी जगह पर भगवान शिव की पूजा की थी। इस मंदिर में पांच मंदिर हैं, जिनमें से सबसे विशाल मंदिर भगवान शिव का है।  इस मंदिर के इतिहास को रामायण काल से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि पुर्तगालियों ने दो बार इस मंदिर पर हमला कर नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी।
शिवा-विष्णु मंदिर- मेलबोर्न, ऑस्ट्रेलिया
भगवान शिव और विष्णु को समर्पित इस मंदिर का निर्माण लगभग 1987 के आस-पास किया गया था। मंदिर के उद्घाटन कांचीपुरम और श्रीलंका से दस पुजारियों ने पूजा करके किया था। इस मंदिर की वास्तुकला हिन्दू और ऑस्ट्रेलियाई परंपराओं का अच्छा उदाहरण है। मंदिर परिसर के अंदर भगवान शिव और विष्णु के साथ-साथ अन्य हिंदू देवी-देवताओं की भी पूजा-अर्चना की जाती है।

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