मक्का के बाद दुनिया का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल हैं सबरीमाला मंदिर, जाने इसकी खास बातें

मक्का के बाद दुनिया का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल हैं सबरीमाला मंदिर, जाने इसकी खास बातें
Publish Date:29 September 2018 10:15 AM

सबरीमला मंदिर को मक्का-मदीना के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तीर्थ स्थल माना जाता है। सबरीमला में हर साल करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। धार्मिक और पौराणिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सबरीमला मंदिर केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से 175 किमी दूर पंपा में स्थित है। 
सबरीमाला मंदिर  शैव और वैष्णव संप्रदाय को जोड़ने वाली एक अद्भुत कड़ी है। मलयालम में 'शबरीमला' का अर्थ होता है, पर्वत। पंपा में स्थित यह धार्मिक स्थान सह्याद्रि पर्वतमाला से घिरा हुआ हैं। सबरीमला मंदिर में दर्शन करने जाने वाले श्रद्धालुओं को पंपा से सबरीमाला तक की करीब 5 किलोमीटर  पैदल यात्रा करनी पड़ती है। 
कौन है भगवान अयप्पा -
सबरीमाला मंदिर के बारे में पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रामायण, महाभागवत के अष्टम स्कंध और स्कंदपुराण के असुर कांड में जिस शिशु शास्ता के बारे में जिक्र है, वो वास्तव में भगवान् अयप्पन ही हैं, जिनका जन्म मोहिनी वेषधारी विष्णु और शिव के समागम से हुआ था। 
श्री अयप्पन का जन्म पंचमी तिथि और वृश्चिक लग्न के संयोग के समय मकर संक्रांति और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के संयोग के दिन ही माना जाता है। इसीलिए मकर संक्रांति के दिन  धर्मषष्ठ मंदिर में उत्सव मनाया जाता है। 
मकर संक्रांति के अलावा नवंबर की 17 तारीख को भी यहां बड़ा उत्सव मनाया जाता है। मलयालम महीनों के पहले पांच दिन को छोड़कर  पूरे साल मंदिर के दरवाजे आम दर्शनार्थियों के लिए बंद रहते हैं।
ऐसा माना जाता है कि परशुराम ने ही अयप्पन की पूजा के लिए पूणकवन के नाम से विख्यात 18 पहाडि़यों के बीच सबरीमला श्रीधर्मषष्ठ में मूर्ति स्थापित की थी। इसके अलावा मालिकापुरत्त अम्मा, गणेश और नागराजा जैसे उप देवताओं की भी मूर्तियां स्थापित हैं। सबरीमाला मंदिर 18 पहाडि़यों के बीच स्थित होने के साथ ही मंदिर के प्रांगण में पहुंचने के लिए 18 ही सीढ़ियों को पार करना पड़ता हैं।  
इसलिए हुआ था निर्माण- 
करीब 800 साल पहले दक्षिण में शैव और वैष्णव सम्प्रदायों के बीच साप्रदायिक तनाव काफी बढ़ गया था। तब उन दोनों के बीच समन्वय और सद्भाव बढ़ाकर कर मतभेदों को दूर करने के लिए श्री अयप्पन की परिकल्पना कर इस धर्मतीर्थ को विकसित किया गया। किसी भी जाति-सम्प्रदाय तथा धर्म को मानने वाले के लिए आज भी यह मंदिर का प्रतीक माना जाता है। सबरीमाला मंदिर में दो मतों के समन्वय के अलावा धार्मिक सहिष्णुता का एक निराला रूप यहां देखने को मिलता है। सबरीमाला मंदिर स्थापत्य के लिहाज से बेहद  खूबसूरत है, मंदिर में अयप्पन सबरीमाला मंदिर में ज्यादातर पुरुष भक्त ही हैं। बूढ़ी औरतों के अलावा महिला श्रद्धालुओं की संख्या बहुत कम है। 
महिलाएं क्यों नहीं आ सकती! -
ऐसी मान्यता है कि श्री अयप्पन ब्रह्माचारी थे, इसीलिए यहां केवल वे छोटी बच्चियां ही आ सकती हैं, जो रजस्वला न हुई हों या वो बूढ़ी औरतें, जो इससे मुक्त हो चुकी हैं। एरुमेलि नामक जगह पर धर्म निरपेक्षता की अद्भुत मिसाल देखने को मिलती है जहां श्री अयप्पन के सहयोगी माने जाने वाले मुसलिम धर्मानुयायी बाबर का मकबरा भी है, जहां मत्था टेके बिना यहां की यात्रा पूरी नहीं मानी जाती।
 

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